Article summary
Abstract
यह शोध-पत्र प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की शिक्षा-पद्धति तथा आधुनिक विश्वविद्यालय प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य नालंदा की शिक्षण संरचना, पाठ्यक्रम, शोध-परक दृष्टिकोण, विद्यार्थी-अनुभव तथा विद्वतापरिषद् की भूमिका का विश्लेषण करते हुए आधुनिक विश्वविद्यालय प्रणाली के साथ उसकी समानताओं एवं भिन्नताओं को स्पष्ट करना है। शोध में यह पाया गया कि नालंदा विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली गुरु-शिष्य परंपरा, संवादात्मक शिक्षण, नैतिक मूल्यों एवं स्वतंत्र चिंतन पर आधारित थी, जबकि आधुनिक विश्वविद्यालय प्रणाली तकनीकी संसाधनों, संरचित पाठ्यक्रम, डिजिटल शिक्षण और वैश्विक मानकीकरण पर अधिक केंद्रित है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि नालंदा में शोध एवं अकादमिक स्वतंत्रता को विशेष महत्त्व दिया जाता था, जो आज की शोध-आधारित विश्वविद्यालय प्रणाली के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हो सकता है। आधुनिक शिक्षा में समावेशन, बहुभाषिकता, डिजिटलीकरण तथा दूरस्थ शिक्षा जैसे आयामों का विस्तार हुआ है, किंतु नालंदा मॉडल की नैतिकता, ज्ञान-संवाद और समग्र व्यक्तित्व निर्माण की अवधारणा आज भी प्रासंगिक बनी हुई है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन बताता है कि प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा प्रणालियों के समन्वय से एक अधिक समावेशी, शोधपरक एवं मूल्य-आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है।