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बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश

कु0 ममता Corresponding Author

शोधार्थी, प्राचीन इतिहास विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या

JournalRVIMJ
Volume / Issue3 / 5
Pages65–73
Published10 May 2026
Paper IDRVIMJ35M260011
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Article summary

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र “बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश”में पर्यावरण की भौतिक एवं जैविक संकल्पना के संदर्भ में
बौद्ध साहित्य में निहित प्रकृतिदृकेन्द्रित दृष्टिकोण का सम्यक् विश्लेषण किया गया है। पर्यावरण को अजीवित
(मृदा, जल, वायु आदि) तथा जीवित (वनस्पति, पशु, मानव एवं सूक्ष्मजीव) तत्त्वों के समन्वित तंत्र के रूप में
स्वीकार किया गया है, जो जीवन की निरंतरता एवं संतुलन के लिए अनिवार्य है। बौद्ध ग्रंथों में जीवन और
पर्यावरण को परस्पर आश्रित एवं पूरक माना गया है, जहाँ जीवों का अस्तित्व प्रकृति के संरक्षण एवं सामंजस्य
पर आधारित है।बौद्ध धर्म का उद्भव एवं विकास प्राकृतिक परिवेश में ही हुआ, जिसका स्पष्ट उल्लेख त्रिपिटक
एवं अन्य बौद्ध ग्रंथों में मिलता है। बुद्ध का ज्ञानार्जन बोधिवृक्ष के नीचे होना, वन एवं उपवनों में विहार, तथा
सारनाथ के हिरण्यवन में धर्मचक्र प्रवर्तन ये सभी प्रसंग बौद्ध ग्रंथों में प्रकृति की महत्ता को रेखांकित करते हैं।
बोधिवृक्ष, वन, नदी एवं पर्वत जैसे प्राकृतिक प्रतीकों का बौद्ध साहित्य में निरंतर उल्लेख यह दर्शाता है कि प्रकृ
ति केवल भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और नैतिक जीवन का आधार है।शोध पत्र में यह
प्रतिपादित किया गया है कि बौद्ध ग्रंथों में वर्णित करुणा, अहिंसा, अपरिग्रह और मध्यम मार्ग की अवधारणाएँ
पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। प्रकृति के प्रति अज्ञानता एवं लोभ से उत्पन्न
असंतुलन को बौद्ध ग्रंथ दुःख का कारण मानते हैं। इस प्रकार बौद्ध साहित्य न केवल मानव जीवन के नैतिक
उत्थान की दिशा में मार्गदर्शन करता है, बल्कि समकालीन पर्यावरणीय संकटों के समाधान हेतु भी एक सशक्त
एवं प्रासंगिक दार्शनिक आधार प्रदान करता है।

Keywords

पर्यावरणीयप्रकृति और मानवकरुणाअहिंसामध्यम मार्गबोधिवृक्षत्रिपिटकप्रकृति संरक्षण

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कु0 ममता (2026). बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश. Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal, 3(5), 65–73. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011

कु0 ममता. “बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश.” Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal, vol. 3, no. 5, 2026, pp. 65–73. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011

कु0 ममता. “बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश.” Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal 3, no. 5 (2026): 65–73. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011

कु0 ममता (2026) ‘बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश’, Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal, 3(5), pp. 65–73. Available at: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011.

कु0 ममता, “बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश,” Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal, vol. 3, no. 5, pp. 65–73, 2026. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011.

कु0 ममता. बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश. Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal. 2026;3(5):65–73. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011.

कु0 ममता. बौद्ध ग्रंथों में पर्यावरणीय संदेश. Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal 2026, 3 (5), 65–73. https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i50011.

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Received15 Mar 2026
Accepted12 Apr 2026
Published10 May 2026
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No funding received.

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