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Abstract
ः गद्दी जनजाति, जो मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में निवास करती है, यह अपनी समृद्ध सांस्कृ तिक और सामाजिक परंपराओं के लिए जानी जाती है। इस शोध-पत्र में गद्दी समुदाय के प्रमुख त्योहारों और मेलों का अध्ययन किया गया है, जो उनकी धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक संरचना और लोक संस्कृति को परिभाषित करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बसे इस समुदाय के लिए ये उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि सामुदायिक मेलजोल, परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक एकता के वाहक भी हैं। इस अध्ययन में गद्दी जनजाति के प्रमुख त्योहारों जैसे ढोलरू, बसोआ, पत्रोडू, हैइरी, लोहड़ी, नुआला उत्सव, होली तहसील के सुटकर गांव में सायर मेला, छतराड़ी जात्रा, शिवरात्रि, भरमौर-जात्रा का विश्लेषण किया गया है। ये त्योहार ऋतु परिवर्तन, कृषि जीवन, देव-परंपराओं और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े होते हैं। शोध में यह स्पष्ट हुआ कि इन त्योहारों के माध्यम से गद्दी समाज अपनी पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में सफल रहा है, भले ही आधुनिकता और बाहरी प्रभावों ने कुछ बदलाव लाए हों। इस अध्ययन में प्राथमिक स्रोतों (साक्षात्कार और क्षेत्रीय अध्ययन) तथा द्वितीयक स्रोतों (साहित्यिक ग्रंथ और ऐतिहासिक शोध) का उपयोग किया गया है। यह स्पष्ट होता है कि गद्दी जनजाति के त्योहार न केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हैं, बल्कि उनकी सामाजिक संरचना और आपसी सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। यह अध्ययन जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।