ISSN (O): 3048-7331Frequency: MonthlyLanguages: MultilanguageDOI Prefix: 10.70650
RVIMJ logoResearch Vidyapith International Multidisciplinary JournalInternational Open Access, Peer-reviewed & Refereed Multidisciplinary JournalISSN: 3048-7331 (Online)DOI Prefix: 10.70650

Verified journal author record

सहायक प्राध्यापक (अतिथि), समाजशास्त्र विभाग, वूमेंस कालेज, समस्तीपुर, एल एन एम यू, दरभंगा DOI: 10.70650/rvimj.2025v2i100003 DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2025v2i100003 Published Date: 01-10-2025 Issue: Vol. 2 No. 10 (2025): October 2025 Published Paper PDF: Download सारांश: माइग्रेशन (प्रवासन) मानव इतिहास का एक अभिन्न अंग रहा है, जो आर्थिक अवसरों, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक कारकों से प्रेरित होकर समाज को नया आकार देता है। यह अध्ययन भारत के संदर्भ में माइग्रेशन के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करता है, जहाँ 2025 तक 400 मिलियन से अधिक आंतरिक प्रवासी हैं, लेकिन घरेलू प्रवासन में 12ः की गिरावट दर्ज की गई है। माइग्रेशन के प्रकारों आंतरिक (ग्रामीण से शहरी) और अंतरराष्ट्रीय (कुशल/अकुशल) में आर्थिक असमानता प्रमुख कारण है, लेकिन जलवायु-प्रेरित विस्थापन (प्क्डब् 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रिकॉर्ड स्तर पर) ने इसे जटिल बना दिया है। प्प्ज् इंदौर के शोध से स्पष्ट है कि ग्रामीण से शहरी पलायन शहरों के दैनिक जीवन को बदल रहा है, जहाँ प्रवासी 40ः शहरी श्रमिक हैं। सामाजिक प्रभाव बहुआयामी हैं। सकारात्मक रूप से, रेमिटेंस (2025 में 100 अरब डॉलर अनुमानित) परिवारों को सशक्त बनाते हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाते हैं, तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण में, प्रवासी पति की अनुपस्थिति घरेलू निर्णयों को प्रभावित करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन में ’ब्रेन ड्रेन’ (3500 करोड़पति 2025 में देश छोड़ने वाले) सामाजिक असमानता बढ़ाता है। नकारात्मक प्रभावों में परिवार विखंडन प्रमुख है, जहाँ 30ः प्रवासी परिवारों में बच्चे भावनात्मक तनाव का शिकार होते हैं, और शहरी स्लम्स में सांस्कृतिक पहचान का संकट उत्पन्न होता है। गुरुत्वाकर्षण मॉडल (म्।ब्-च्ड रिपोर्ट) से पता चलता है कि निकटवर्ती स्थानों की ओर प्रवासन सामाजिक नेटवर्क को मजबूत करता है, लेकिन ब्व्टप्क्-19 के बाद 11.8ः गिरावट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। माइग्रेशन सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक है, लेकिन असमानता को कम करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप जैसे रेमिटेंस-आधारित विकास योजनाएँ और जलवायु अनुकूलन आवश्यक हैं। मुख्य शब्दः प्रवासन, सामाजिक प्रभाव, आंतरिक विस्थापन, रेमिटेंस, परिवार विखंडन, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक सशक्तिकरण, आर्थिक असमानता, गुरुत्वाकर्षण मॉडल।

डॉ० स्वीटी दर्शन has authored or co-authored 1 published article in Research Vidyapith International Multidisciplinary Journal.

1 published article

Author information

Affiliation and scholarly identity

  • सहायक प्राध्यापक (अतिथि), समाजशास्त्र विभाग, वूमेंस कालेज, समस्तीपुर, एल एन एम यू, दरभंगा DOI: 10.70650/rvimj.2025v2i100003 DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2025v2i100003 Published Date: 01-10-2025 Issue: Vol. 2 No. 10 (2025): October 2025 Published Paper PDF: Download सारांश: माइग्रेशन (प्रवासन) मानव इतिहास का एक अभिन्न अंग रहा है, जो आर्थिक अवसरों, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक कारकों से प्रेरित होकर समाज को नया आकार देता है। यह अध्ययन भारत के संदर्भ में माइग्रेशन के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करता है, जहाँ 2025 तक 400 मिलियन से अधिक आंतरिक प्रवासी हैं, लेकिन घरेलू प्रवासन में 12ः की गिरावट दर्ज की गई है। माइग्रेशन के प्रकारों आंतरिक (ग्रामीण से शहरी) और अंतरराष्ट्रीय (कुशल/अकुशल) में आर्थिक असमानता प्रमुख कारण है, लेकिन जलवायु-प्रेरित विस्थापन (प्क्डब् 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रिकॉर्ड स्तर पर) ने इसे जटिल बना दिया है। प्प्ज् इंदौर के शोध से स्पष्ट है कि ग्रामीण से शहरी पलायन शहरों के दैनिक जीवन को बदल रहा है, जहाँ प्रवासी 40ः शहरी श्रमिक हैं। सामाजिक प्रभाव बहुआयामी हैं। सकारात्मक रूप से, रेमिटेंस (2025 में 100 अरब डॉलर अनुमानित) परिवारों को सशक्त बनाते हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाते हैं, तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण में, प्रवासी पति की अनुपस्थिति घरेलू निर्णयों को प्रभावित करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन में ’ब्रेन ड्रेन’ (3500 करोड़पति 2025 में देश छोड़ने वाले) सामाजिक असमानता बढ़ाता है। नकारात्मक प्रभावों में परिवार विखंडन प्रमुख है, जहाँ 30ः प्रवासी परिवारों में बच्चे भावनात्मक तनाव का शिकार होते हैं, और शहरी स्लम्स में सांस्कृतिक पहचान का संकट उत्पन्न होता है। गुरुत्वाकर्षण मॉडल (म्।ब्-च्ड रिपोर्ट) से पता चलता है कि निकटवर्ती स्थानों की ओर प्रवासन सामाजिक नेटवर्क को मजबूत करता है, लेकिन ब्व्टप्क्-19 के बाद 11.8ः गिरावट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। माइग्रेशन सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक है, लेकिन असमानता को कम करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप जैसे रेमिटेंस-आधारित विकास योजनाएँ और जलवायु अनुकूलन आवश्यक हैं। मुख्य शब्दः प्रवासन, सामाजिक प्रभाव, आंतरिक विस्थापन, रेमिटेंस, परिवार विखंडन, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक सशक्तिकरण, आर्थिक असमानता, गुरुत्वाकर्षण मॉडल।

Published work

Articles in RVIMJ