Article summary
Abstract
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के प्रमुख छायावादी कवि, नाटककार और चिंतक हैं, जिनकी काव्य दृष्टि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय संवेदनाओं का समन्वित रूप प्रस्तुत करती है। प्रस्तुत अध्ययन में जयशंकर प्रसाद की काव्य दृष्टि का विश्लेषण सामाजिक, ऐतिहासिक, राष्ट्रीय, धार्मिक तथा आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में किया गया है। प्रसाद की रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, राष्ट्रप्रेम तथा मानवीय मूल्यों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी कविता में सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वासों तथा असमानताओं के प्रति विरोध के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और समानता का संदेश निहित है। प्रसाद की काव्य दृष्टि में ऐतिहासिक गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान का विशेष स्थान है, जो स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से प्रेरित है। उनके साहित्य में धार्मिक और आध्यात्मिक तत्वों का भी समावेश है, जिसमें वेद, उपनिषद तथा भारतीय दर्शन की झलक मिलती है। इसके अतिरिक्त उनके काव्य में रूपक, प्रतीक, अलंकार और चित्रात्मकता का प्रभावशाली प्रयोग उनकी सर्जनात्मकता और शिल्प-कौशल को दर्शाता है। आधुनिकता और परंपरा के बीच उत्पन्न द्वंद्व भी प्रसाद की काव्य दृष्टि का महत्वपूर्ण पक्ष है, जिसमें उन्होंने भारतीय परंपरा को बनाए रखते हुए आधुनिक विचारधाराओं को स्वीकार करने का प्रयास किया है। उनकी भाषा और शैली संस्कृतनिष्ठ, भावपूर्ण और चित्रात्मक है, जो पाठकों के मन में गहरी संवेदना उत्पन्न करती है। इस प्रकार जयशंकर प्रसाद की काव्य दृष्टि भारतीय साहित्य में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीयता और मानवीय मूल्यों के समन्वय का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।