Article summary
Abstract
ग्रामीण अर्थव्यवस्था किसी भी राष्ट्र की समग्र आर्थिक प्रगति का आधार होती है, विशेष रूप से भारत जैसे कृषि प्रधान देश में। प्रस्तुत शोध-पत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सरकार की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इसमें कृषि विकास, सार्वजनिक वित्त पोषण, ग्रामीण अवसंरचना, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन, पंचायती राज व्यवस्था तथा डिजिटलीकरण जैसे प्रमुख पक्षों का अध्ययन किया गया है। सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ, जैसे किसान कल्याण योजनाएँ, ग्रामीण आजीविका मिशन, डिजिटल भुगतान प्रणाली तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के प्रोत्साहन कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण विकास केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, जल प्रबंधन तथा सूचना तकनीक का समन्वित विकास भी आवश्यक है। साथ ही जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएँ एवं बेरोजगारी जैसी चुनौतियों पर भी विचार किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रभावी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, स्थानीय भागीदारी तथा तकनीकी नवाचार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आत्मनिर्भर एवं सतत बनाया जा सकता है।