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स्वच्छता, पर्यावरण और सतत विकास में परस्पर संबंध स्वच्छता

Author(s): डॉ. अमरेश कुमार अमर, एम०ए० (गोल्डमेडलिस्ट), अतिथि सहायक प्राध्यापक, अर्थषास्त्र विभाग, एस०एन०एस०आर०के०एस० कॉलेज, सहरसा, बी०एन०एम०यू०, मधेपुरा   DOI: 10.70650/rvimj.2026v3i10014   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i10014
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download

सारांश: स्वच्छता के सभी प्रावधान सुविधा, जो मानव के मल-मूत्र एवं कचरा अपशिष्ट पदार्थ आदि का निष्कासन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, यही प्रक्रिया स्वच्छता कहलाती है। सभी प्रकार की गंदगी को दूर कर निरोग व तंदुरुस्त जीवन जीना ही स्वच्छता का मूलमंत्र है। स्वच्छता से ही किसी स्वच्छ राष्ट्र का निर्माण होता है। स्वच्छता को वैश्विक स्तर पर भी आज एक महत्वपूर्ण मानक के रूप स्वीकार किया गया है। वास्तव में स्वच्छ वातावरण ही स्वच्छ पर्यावरण को जन्म देता है जो सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। परंतु आज भारत में बढ़ती जनसंख्या, निर्धनता, गरीबी, अशिक्षा और बढ़ती शहरीकरण के कारण प्रदूषण की समस्या बहुत गम्भीर बन गई है। प्रदूषण के इन सभी समस्याओं में अस्वच्छता सबसे बड़ी समस्या है। इसका कारण, कचरा अपशिष्ट पदार्थ आदि जिसका अव्यवस्थित और असंयमित तौर-तरीके से उपयोग करना ही स्वच्छ वातावरण के लिए सबसे बड़ी बाधा है। जो यह मानवीय संसाधन को ह्रासमान की स्थिति पर पहुंचा देता है इससे सतत विकास की बात तो दूर इससे समस्त आर्थिक क्रियाकलाप ही अवरूद्ध हो जाता है। ऐसा नहीं है कि कचरा अपशिष्ट की समस्या केवल विकासशील देशों में है बल्कि विकसित देशों में भी गंभीर समस्या है। लेकिन वहां संसाधन तथा स्वच्छता के प्रति वहाँ के नागरितक जागरूक है और वे अपने देश व पर्यावरण को साफ रखने में सक्षम है। इस संदर्भ में भारत सरकार ने पूर्व में ही ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम जो प्रथम पंचवर्षीय योजना के रूप में 1954 में शुरू किया गया। 1981-90 के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता के लिए अंतरराष्ट्रीय दशक में ग्रामीण स्वच्छता पर जोर देना शुरू किया गया। 1986 में केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम और 1989 से संपूर्ण स्वच्छता के अंतर्गत जागरूकता तथा स्वच्छता सुविधा पर अधिक जोर दिया। निर्मल ग्राम पुरस्कार 2005 में प्रदान किए गए जिसमें पूर्ण स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त ग्राम पंचायत की स्थिति को प्राप्त करना रहा । सर्वव्यापी स्वच्छता कवरेज हासिल करने के प्रयासों में वृद्धि करने तथा स्वच्छता पर केंद्रित करने हेतु भारत सरकार के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया गया जिसका लक्ष्य 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छता की पूर्ण स्थिति प्राप्त करना था। परंतु आज भी इस प्रक्रिया और सरकार द्वारा उठाए गए इतने साहस पूर्ण कमदों के बाबजूद यह असफल है। इसके असफलता के अनेक कारण है। इसके लिए खास कर मनुष्य के व्यवहारों में बदलाव अनिवार्य है और इस हेतु जन जागृति पैदा करने के साथ साथ सरकार को भी सकारात्मक एवं कानूनन प्रयास करने की आवश्यकता है। अतः स्वच्छता, पर्यावरण और सतत विकास में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में परस्पर अन्तर्संबंध है। इसलिए समग्र विकास हेतु स्वच्छता, पर्यावरण और सतत विकास में त्रिभुजीय संबंध स्थापित करना आवश्यक है। इसी आवश्यकता एवं उदेश्य से अभिप्रेरित होकर प्रस्तुत शोध- पत्र लेखन तैयार किया गया है।

मुख्य शब्द: स्वच्छता, पर्यावरण, सतत् विकास, ग्रामीण स्वच्छता, स्वरोजगार.


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