बाणभट्ट की आत्मकथा में भारतीय सांस्कृतिक चेतना
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download
सारांश: हिंदी साहित्य में ऐतिहासिक उपन्यासों की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। इस परंपरा में हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित बाणभट्ट की आत्मकथा एक विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण कृति के रूप में प्रतिष्ठित है। यह कृति केवल एक ऐतिहासिक पात्र के जीवन का वर्णन नहीं करती, बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध आयामों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। उपन्यास में सातवीं शताब्दी के सामाजिक जीवन, धार्मिक विचारधारा, नारी-जीवन, प्रकृति-प्रेम, कला-संवेदना और मानवतावादी दृष्टिकोण का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है। इस शोध-लेख का उद्देश्य उपन्यास में निहित सांस्कृतिक तत्वों का विश्लेषण करना है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि लेखक ने इतिहास और कल्पना के समन्वय के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूलभूत मूल्योंकृ सहिष्णुता, करुणा, समन्वय और लोकमंगलकृको अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। इस प्रकार यह कृति भारतीय सांस्कृतिक चेतना की गहन अभिव्यक्ति के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
प्रमुख शब्द: भारतीय संस्कृति, ऐतिहासिक उपन्यास, नारी-दृष्टि, मानवतावाद, सांस्कृतिक समन्वय.