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दार्शनिक चिंतन, शास्त्रीय विरासत और मनोविज्ञान का समग्र दृष्टिकोण राष्ट्रीयः शिक्षा नीति 2020

Author(s): डॉ. सीमा शर्मा, सह आचार्य (हिंदी) एवं अध्यक्ष भाशा विभाग, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ   DOI: 10.70650/rvimj.2026v3i4002   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i4002
Published Date: 02-04-2026 Issue: Vol. 3 No. 4 (2026): April 2026 Published Paper PDF: Download

सारांश: शिक्षा मानव जीवन का ऐसा सशक्त माध्यम है जो न केवल ज्ञान के प्रसार का कार्य करती है, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास, मूल्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी पोषित करती है। शिक्षा के दार्शनिक, शास्त्रीय एवं मनोवैज्ञानिक आधारों का अध्ययन इस दिशा में आवश्यक है, क्योंकि यही वे तीन स्तंभ हैं जिन पर किसी भी शिक्षण व्यवस्था की वैचारिक संरचना टिकी होती है। दार्शनिक दृष्टि शिक्षा को उसके उद्देश्यों, मूल्यों और आदर्शों से जोड़ती है शास्त्रीय दृष्टि भारतीय परंपरा, वेद-उपनिषद, गीता और गुरुकुल पद्धति के माध्यम से शिक्षा को सांस्कृतिक गहराई प्रदान करती है जबकि मनोवैज्ञानिक दृष्टि शिक्षार्थी के व्यक्तित्व, अभिरुचि, प्रेरणा और अधिगम प्रक्रिया को समझने में सहायक होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इन तीनों आयामों का एकीकृ त रूप में समावेश करते हुए मूल्यपरक, व्यवहारपरक और अनुभवपरक शिक्षा की अवधारणा प्रस्तुत की है। इस नीति में निहित समग्र विकास (भ्वसपेजपब क्मअमसवचउमदज), बहुविषयक दृष्टिकोण (डनसजपकपेबपचसपदंतल ।चचतवंबी) और आजीवन अधिगम (स्पमिसवदह स्मंतदपदह) के सिद्धांत शिक्षा को न केवल आधुनिक वैश्विक संदर्भ में, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में भी पुनर्स्थापित करते हैं। इस शोध-पत्र का उद्देश्य इन आधारों के परस्पर संबंधों की विवेचना करते हुए यह प्रतिपादित करना है कि सशक्त और मानवीय समाज के निर्माण हेतु शिक्षा के दार्शनिक, शास्त्रीय एवं मनोवैज्ञानिक एकत्व को समझना और व्यवहार में लाना अत्यंत आवश्यक है। यह शोधपत्र वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रविधि पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दार्शनिक, शास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक पक्षों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। प्राथमिक स्रोत के रूप में नीति-दस्तावेज़ तथा द्वितीयक स्रोत के रूप में संबंधित ग्रंथ, शोध-पत्र और जर्नल प्रयुक्त हुए हैं। अध्ययन में भारतीय ज्ञानपरंपरा, मूल्य शिक्षा, आत्मविकास और शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण को आधार बनाकर यह प्रतिपादित किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय परंपरा और आधुनिक मनोविज्ञान का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करती है।

मुख्य शब्द: दार्शनिक चिंतन, शास्त्रीय भारतीय ज्ञान, मनोविज्ञान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समग्र शिक्षा दृ ष्टिकोण, शिक्षा और संस्कृति, शैक्षिक नीतियाँ, लोककल्याण और शिक्षा, बहुभाषिक शिक्षा, नैतिक और मूल्य शिक्षा।.


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