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महाकवि कालिदास के महाकाव्यों में पर्यावरणीय चेतना

Author(s): डॉ० सन्तोष कुमार मिश्र, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, संस्कृत, श्री विश्वनाथ पी० जी० कालेज कलान, सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश   DOI: 10.70650/rvimj.2026v3i10011   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i10011
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download

सारांश: भारतीय साहित्य में प्रकृति और पर्यावरण का गहरा संबंध रहा है। संस्कृत साहित्य के महान कवि कालिदास ने अपने महाकाव्यों में प्रकृति के विविध रूपों का अत्यंत सूक्ष्म और सौंदर्यपूर्ण चित्रण किया है। उनके महाकाव्य रघुवंश और कुमारसंभव में पर्वत, नदियाँ, वनस्पति, ऋतुएँ, पशु-पक्षी तथा मानव जीवन के साथ प्रकृति के गहरे संबंध का वर्णन मिलता है। कालिदास के काव्यों में प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं बल्कि जीवंत पात्र के रूप में उपस्थित है। यह लेख कालिदास के महाकाव्यों में निहित पर्यावरणीय चेतना, प्रकृति संरक्षण के संदेश तथा मानव-प्रकृति संबंध की अवधारणा का विश्लेषण करता है।

मुख्य शब्द: भारतीय काव्य परंपरा, संस्कृत साहित्य, प्रकृति और मानव संबंध।


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