गढ़वाल की लोकपरंपरा में बाजूबंद की प्रासंगिकताः स्त्री मन की अभिव्यक्ति के विशेष संदर्भ में
Published Date: 10-02-2025 Issue: Vol. 2 No. 2 (2025): February 2025 Published Paper PDF: Download
सारांश- मध्यहिमालय प्राचीन काल से ही धार्मिक स्थानों के केन्द्र स्थल तथा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत व अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण सर्वत्र पहचाना जाता है। हिमालय के पांच खण्डों में एक खण्ड केदारखण्ड है, जो आज का गढ़वाल मण्डल है। गढ़वाली समाज परम्परा, विष्वासों से प्राप्त मानवीय मूल्यों का पोशक और रक्षक रहा है। यहां का खान-पान, रहन-सहन, भौगोलिक परिवेश, बोली-भाषा और सामूहिक प्रवृत्तियाँ यहां के लोकजीवन को अभिव्यक्त करती है। गढ़वाल की परम्परायें, रीति-रिवाज, मान्यताएं और विश्वास इसे अलग एवं विशिष्ट पहचान दिलाते हैं, जो ऐतिहासिक, सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ संस्कृति के विविध रूप लोक नाटको, लोक कथाओं, लोक गाथाओं व लोकगीतों के रूप में मानव हृदय से निकलकर मनोरंजन, शिक्षा व ज्ञान का मार्ग प्रषस्त करते हैं। इनमें ‘लोकगीत‘ संस्कृति व संवाद का सबसे सषक्त माध्यम रहा है, जो हृदय की भावनाओं और विभिन्न राग वृत्तियों की अभिव्यक्ति करता है।.
मुख्य शब्द: बाजूबंद, लोकजीवन, लोकगीत, गायन-शैली, परंपरा आदि।.